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राम जन्मभूमि में हमले में चार को आजीवन कारावास, एक आरोपी बरी

Posted on 2019-06-18

अयोध्या के राम जन्मभूमि परिसर में करीब 14 वर्ष पहले हुए आतंकी हमले में इलाहाबाद की स्पेशल ट्रायल कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए चार आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। वर्ष 2005 में हुए हमले में वहीं एक आरोपी मोहम्मद अजीज को बरी कर दिया है। भगवान श्रीराम वनवास के 14 वर्ष बाद अयोध्या लौटे थे। समय की अवधि तो 14 वर्ष ही है, लेकिन प्रकरण बिल्कुल जुदा है। प्रयागराज में स्पेशल कोर्ट आज से 14 वर्ष पहले राम जन्मभूमि परिसर में हुए आतंकी हमले में फैसला दिया है।

अयोध्या में आतंकी विस्फोट मामले में विशेष कोर्ट ने मोहम्मद अजीज को साक्ष्य के अभाव में दोष मुक्त किया गया । वही इरफान, मोहम्मद शकील , मोहम्मद नफीस , आसिफ , इकबाल उर्फ फारुख को आजीवन कारावास के साथ ढाई लाख रुपए का जुर्माना किया है। अयोध्या के राम जन्मभूमि में 5 जुलाई 2005 को हुए आतंकी हमले के मामले में नैनी जेल स्थित विशेष कोर्ट में सुनवाई पूरी हुई थी। पीएसी के दलनायक कृष्ण चन्द सिंह ने बिना विलंब दिन के दो बजे थाना राम जन्मभूमि में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। 2006 में फैजाबाद से इलाहाबाद की जिला अदालत में स्थानांतरित हुए इस मामले की सुनवाई सुरक्षा कारणों से नैनी सेंट्रल जेल में ही चल रही थी।लगातार 14 वर्ष की सुनवाई में कुल 63 लोगों से पूछताछ हुई। इसमें कई बार वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए भी सुनवाई हुई।

स्पेशल कोर्ट के इस फैसले को देखते हुए अयोध्या से लेकर प्रयागराज समेत उत्तर प्रदेश के कई जिलों में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए है। जज दिनेश चंद्र की कोर्ट में दोनों पक्षों की बहस 11 जून को पूरी हो चुकी थी। आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के इस हमले में एक टूरिस्ट गाइड समेत सात लोगों की मौत हो गई थी। पुलिस की जवाबी हमले में पांच आतंकवादी मार गिराए गए थे। आतंकियों से मोर्चा लेने के दौरान सीआरपीएफ और पीएसी के सात जवान गंभीर रूप से जख्मी भी हुए थे।  

मारे गए आतंकियों के पास से बरामद मोबाइल सिम की जांच से पांच अभियुक्तों आसिफ इकबाल उर्फ फारुक, मो. शकील, मो. अजीज और मो. नसीम का नाम प्रकाश में आया था। जिन्हें 28 जुलाई 2005 को और डा. इरफान को इसके पूर्व ही 22 जुलाई को गिरफ्तार किया गया था। आरोप है कि इन सभी ने मिलकर हमले की साजिश रची और हथियार जुटाए थे। सभी आतंकी नेपाल के रास्ते भारत में घुसे थे। सुरक्षा एजेंसियों ने एक ही घंटे के अंदर आतंकियों को ढेर कर दिया था और किसी बड़े खतरे को टाल दिया था। आतंकी बतौर भक्त अयोध्या में घुसे। पूरे इलाके की रेकी की और टाटा सूमो में ही सफर किया। हमले से पहले आतंकियों ने राम मंदिर का दर्शन किया था। गाड़ी में ही सवार होकर आतंकी रामजन्मभूमि परिसर में आए और सुरक्षा घेरा तोड़ते हुए घुस गए, वहां पर ग्रेनेड फेंक हमला किया।

अयोध्यावासी रामलला के गुनहगारों को सजा-ए-मौत से कम नहीं चाहते थे। साधु-संत से लेकर श्रद्धालु तक कहते हैं कि सजा ऐसी हो कि कोई हमारे आराध्य पर हमले का दुस्साहस न कर सके। इन सभी को इसका संतोष है कि पांच जुलाई 2005 को श्रीराम जन्मभूमि परिसर में टेंट में विराजमान रामलला पर फिदायीन हमला करने आए पांच आतंकियों को उसी दिन रामनगरी में सजा-ए-मौत मिल गई थी। आतंकियों ने हैंड ग्रेनेड, एके 47, राकेट लांचर से लैस होकर हमला बोला था। हमलावरों ने सबसे पहले वह जीप ब्लास्ट कर उड़ा दी जिससे वह आए थे।

पांच जुलाई 2005 की सुबह करीब सवा नौ बजे आतंकियों ने रामजन्म भूमि परिसर में धमाका किया था। करीब डेढ़ घंटे तक चली मुठभेड़ में पांच आतंकवादी मार गिराए गए थे जिनकी शिनाख्त नहीं हो सकी थी। इस हमले में रमेश कुमार पांडेय व शांति देवी को जान गंवानी पड़ी थी जबकि घायल कृष्ण स्वरूप ने बाद में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया।

इसके अलावा दारोगा नंदकिशोर, हेड कांस्टेबल सुल्तान सिंह, धर्मवीर सिंह पीएसी सिपाही, हिमांशु यादव, प्रेम चंद्र गर्ग व सहायक कमांडेंट संतो देवी जख्मी हो गये थे। पुलिस की तफ्तीश में असलहों की सप्लाई करने और आतंकियों के मददगार के रूप में आसिफ इकबाल, मो. नसीम, मो. अजीज, शकील अहमद और डॉ. इरफान का नाम सामने आया। इन सभी को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया।2006 में प्रयागराज की विशेष कोर्ट के आदेश पर उन्हें फैजाबाद से प्रयागराज की सेंट्रल जेल नैनी जेल भेज दिया गया।
 

रामलला को उड़ाने आए थे, खुद उड़ गए फिदायीन आतंकी

पांच जुलाई 2005 रामनगरी के इतिहास का काला दिन थी। धमाकों और गोलियों की आवाज से रामनगरी हिल उठी थी। जिस समय अयोध्या में टेंट में विराजमान रामलला पर आतंकियों ने हमला किया, मंदिरों में रामनाम और घंटा-घडिय़ाल की ध्वनि गूंज रही थी, लोग पूजा-पाठ म

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