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स्वस्थ जल स्वास्थय के लिए लाभदायक

Posted on 2014-08-19

गाजियाबाद। क्षिति, जल, पावक, गगन, समीर पंचतत्व हैं जिनसे हमारा षरीर बना है। हमारे जीवन में जल के महत्व से सभी परिचित हैं। जल की संरचना में दो भाग हाइड्रोजन और एक भाग ऑक्सीजन का योगदान होता है। छह प्रकार के रसों, मधुर, कटु, अम्ल, लवण, कशाय तथा तिक्त के स्वाद का अनुभव हम जल के कारण ही कर पाते हैं।
थकावट, सुस्ती, बेहोषी, नींद और कोश्ठ बद्धता को दूर करने में जल की भूमिका किसी से भी छिपी नहीं है। स्नान करने पर यह षरीर को निर्मल और तरोताजा बनाता है। यह षरीर के भीतर-बाहर के सभी दोशों को दूर कर देता है।
हाइड्रोपैथी अर्थात पानी से उपचार में सोच समझ कर पानी का इस प्रकार प्रयोग किया जाता है कि विभिन्न षरीर के भागों जैसे अमाषय छोटी आंत, बड़ी आंत, मूत्राषय, मलाषय आदि में जमे दोशों को षरीर से निकाल देता है। कोश्ठ बद्धता (कब्ज) जो अनेक रोगों की जननी है, के निराकरण के लिए जल-चिकित्सा सबसे अच्छा उपाय है। संसार की प्राचीनतम पुस्तक ऋग्वेद में भी जल की महत्ता का वर्णन किया गया है। इसमें जल को औशधि तथा समस्त रोगों का नाषक कहा गया है।
हमारे षरीर में लगभग 70 प्रतिषत जल है। जल का सबसे प्रमुख कार्य हमारे षरीर को कठोर बनाना है। हर एक बदलते मौसम के अनुरूप षरीर को ढालने के लिए जल के गुणों का विभिन्न प्रकार से लाभ उठाया जा सकता है। नंगे पैर फर्ष पर या गीली ओस पर सैर करने से हमारे मस्तिश्क और आंखों में विषेश तरावट पहुंचती है और षरीर को अभूतपूर्व षांति का अहसास होता है।
नंगे पैरों गीले पत्थरों पर चलने से षरीर में उपस्थित अनावष्यक गर्मी खत्म हो जाती है। जिन लोगों को पैरों के तलुओं में ष्बर्निंग सैन्सैषनष् की षिकायत हो उनके लिए यह सबसे अच्छा उपाय है। पित्तजनित रोगों के निदान के लिए षीतल जल में चलना लाभकारी हो सकता है। ठंडे जल से हाथ मुंह धोने तथा बर्फबारी