• For Ad Booking:
  • +91 9818373200, 9810522380
  •  
  • Email Us:
  • news@tbcgzb.com
  •  
  • Download e-paper
  •  
  •  

यशोदा अस्पताल की नई उपलब्धि

Posted on 2014-09-06

गाजियाबाद। मूत्र नली में सिकुड़न का अपनी तरह का विष्व का पहला सफल आपरेषन यषोदा अस्पताल में किया गया है। इस सर्जरी की खास बात यह है कि मूत्र नली में सिकुड़न के स्थान पर जांघ के उत्तक (फेषिया लाटा) की ग्राफ्टिंग कर नई नली बनाई गई है। इस आपरेषन में पहली बार इन उत्तकों का उपयोग ग्राफ्टिंग के लिए किया गया है। इस तरह के होने वाले आपरेषनों में सामान्यतौर पर मुंह के अंदर की खाल का उत्तक (बौकल मुकोसा) निकाल कर प्लास्टिक सर्जरी के जरिये ग्राफ्टिंग कर प्रभावित स्थान पर नई नली बना दी जाती है। कई बार सिर अथवा कान के पीछे की खाल से भी सर्जरी कर दी जाती है, मगर इनमें बाल उगने समेत अन्य दिक्कतें होती हैं। ऐसे मरीज जो गुटखा-तंबाकू लंबे समय से खाते रहे हैं, उनके मुंह के अंदर की खाल खराब हो जाती है और उसकी ग्राफ्टिंग नहीं हो पाती है। जिससे जीवन भर पेट में नली लगा कर पेषाब बाहर निकालते हैं।
यषोदा के यूरोलॉजी विभाग के अध्यक्ष डा. वैभव सक्सेना ने प्लास्टिक सर्जन डा. नंदनी आर. के साथ मिल कर यूरो सर्जरी के क्षेत्र में नया आयाम स्थापित किया है।
डा. वैभव सक्सेना ने बताया कि पुरुशों की मूत्र नली में सिकुड़न का रोग मूत्र नली में संक्रमण और चोट के कारण होता है। इसके चलते पेषाब का रुकना, बार-बार आना अथवा नहीं आना होता है। जिस कारण मरीज के पेट में चीरा लगा कर नली के जरिये पेषाब बाहर निकाला जाता है। कम पानी पीने से इस तरह की समस्या देखी गईं है।
डा. वैभव सक्सेना ने प्लास्टिक सर्जन डा. नंदनी आर. के साथ नया प्रयोग किया है। डा. वैभव इस तरह के चार सफल आपरेषन कर चुके हैं।
तंबाकू-गुटखे वालों को मिलेगी राहत
तंबाकू-गुटखे खाने के कारण खराब हो चुकी मुंह की खाल वाले मरीजों के लिए यह नई तकनीक वरदान साबित हुई है। डा. वैभव का दावा है कि इस तरह का आपरेषन ज्यादा मंहगा