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बेहोशी हो सकती है खतरनाक, जागरुकता है असली बचाव

Posted on 2019-05-21

एक बड़ी संख्या में लोगों को अपने जीवन काल में कभी न कभी बेहोशी महसूस होती है। ज्यादातर लोग इसे मिर्गी समझने की भूल करते हैं और कुछ लोग अंधविश्वास के चक्कर में पड़कर झाड़-फूंक करवाकर परेशानी को और बढ़ा लेते हैं। बेहोशी से संबंधित अलग-अलग पहलुओं और इसके इलाज के बारे में जानकारी दे रहे हैं कुछ विशेषज्ञ डॉक्टर..

बेहोश होने को चिकित्सकीय भाषा में सिनकोप कहा जाता है। अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन सिनकोप को अस्थायी बेहोशी कहता है जो मस्तिष्क में खून का प्रवाह अपर्याप्त होने से होता है। ऐसा तब होता है,जब हृदय मस्तिष्क को पर्याप्त ऑक्सीजन पंप करना छोड़ देता है।

कुछ समय के लिए बेहोश हो जाने के मामले अक्सर होते रहते हैं, लेकिन परेशानी तब खड़ी होती है, जब हम इसे मिर्गी मानकर न्यूरोलॉजिस्ट के पास चले जाते है। दरअसल, सही सूचना, जागरूकता का अभाव बेहोशी की समस्या के प्रमुख कारण हैं। आपको पता होना चाहिए कि बेहोशी का कारण दिल की धड़कन की अनियमित स्थिति होती है और इसलिए न्यूरोलॉजिस्ट के पास न जाकर आपको हृदयरोग विशेषज्ञ के पास जाना जरूरी है। अनियिमत धड़कन की स्थिति जब बहुत धीमी होती है तो पीड़ित चल-फिर नहीं पाता और बेहोश हो जाता है। वहीं तेज धड़कन की स्थिति में उसकी जान भी खतरे में पड़ सकती है
हृदय रोगी हो जाएं सचेत
वैसे तो सिनकोप (बेहोशी की स्थिति) के अधिकांश शिकार साठ साल से अधिक उम्र के लोग हैं। हालांकि कम उम्र के लोगों और यहां तक कि बच्चों में भी बेहोशी की समस्या उत्पन्न हो सकती है,पर जो लोग कोरोनरी आर्टरी डिजीज, कॉनजेनाइटल हार्ट डिफेक्ट्स, वेंट्रीकुलर डिसफंक्शन के साथ हार्ट अटैक झेल चुके हैं, उन्हें जोखिम ज्यादा हो सकता है। दरअसल, सिनकोप की वजह से अचानक दिल का दौरा पड़ सकता है। अगर दिल की धड़कन की असामान्य स्थिति(

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