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जानिए, कौन हैं पद्मश्री से नवाजे गए मुन्‍ना मास्‍टर, जिनके बेटे की BHU में नियुक्ति पर हुआ था बवाल


2020-01-26

नई दिल्‍ली : 71वें गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्‍या पर पद्म पुरस्कारों का भी ऐलान हुआ। इसमें राजस्थान के भजन गायक रमजान खान उर्फ मुन्ना मास्टर को पद्मश्री से नवाजा गया। वह प्रोफेसर फिरोज खान के पिता हैं, जिनका पिछले दिनों बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) के संस्कृत निकाय में नियुक्ति को लेकर बवाल मचा था। मुन्ना मास्टर जयपुर के निवासी हैं। वे भगवान श्रीकृष्ण और गाय पर भक्ति गीत के लिए मशहूर हैं। मुन्‍ना मास्‍टर के इसके जरिए कवि रसखान की परंपरा का आगे बढ़ाया है। गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर सरकार ने पद्म पुरस्कारों का ऐलान किया। इसमें 118 हस्तियों को पद्मश्री देने का ऐलान किया गया है, जिसमें मुन्ना मास्टर का भी नाम शामिल है। 61 वर्षीय मुन्ना मास्टर जयपुर के बगरू के रहने वाले हैं। उन्होंने श्री श्याम सुरभि वंदना नाम से किताब भी लिखी है। वह संस्कृत का भी अच्छा ज्ञान रखते हैं। संस्‍कृत पढ़ाने पर रिश्‍तेदारों ने तोड़ लिया था नाता मुस्लिम समाज और उनके रिश्तेदारों से फिरोज खान के पिता रमजान खान से यह कहते हुए नाता-रिश्ता खत्म कर लिया था कि यदि वे अपने बेटे को संस्कृत पढ़ा रहे हैं तो बिरादरी उनसे रिश्ता नहीं रखेगी। लेकिन रमजान खान ने अपने समाज और रिश्तेदारों की परवाह किए बिना फिरोज खान सहित चारों बेटों को संस्कृत की पढ़ाई कराई। हालांकि अब जब रमजान खान का बड़ा बेटा फिरोज खान होनहार बन गया तो रिश्तेदारों ने वापस रिश्ता जोड़ लिया। मदरसे के बजाय स्कूल में पढ़ने पर हुआ विरोध बगरू कस्बे में दो कमरे और एक छोटे से बरामदे में रहने वाले फिरोज खान के परिजनों का कहना है कि उन्होंने पीढ़ियां से गोसेवा की है। पहले फिरोज खान के दादा गफूर खान गो सेवा करते थे और बाद में पिता रमजान खान ने कृष्ण और राम के भजन गायन को पेशा बनाया। रमजान खान ने बच्

मौनी अमावस्या पर करें ये 5 आसान उपाय, बदल जाएगी आपकी किस्मत


2020-01-21

Mauni Amavasya 2020: माघ मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को मौनी अमावस्या या माघी अमावस्या के नाम से जाना जाता है। 24 जनवरी दिन शुक्रवार को पड़ने वाली मौनी अमावस्या के दिन आप कुछ आसान उपायों को करके अपनी किस्मत को बदल सकते हैं। ये उपाय करने से अपका भाग्य बदलेगा, जीवन में बेहतर होगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मौनी अमावस्या के दिन उपाय करने से उसके विशेष फल प्राप्त होते हैं। इस दिन गंगा स्नान के बाद भगवान विष्णु और शिव की आराधना की जाती है, पूजा पाठ के साथ दान किया जाता है। दिनभर मौन व्रत रखा जाता है। मौनी अमावस्या को करने वाले उपाय 1. मौनी अमावस्या के दिन चींटियों को शक्कर मिला हुआ आटा खिलाने से व्यक्ति की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। 2. माघी या मौनी अमावस्या के दिन स्नान के बाद आटे की गोलियां बना लें। फिर किसी नदी या तालाब किनारे जाकर उन गोलियों को मछलियों को खिला दें। इससे आपके जीवन में चल रही समस्याओं का अंत हो जाएगा। 3. आज के दिन आटे में तिल मिलाकर रोटी बनाएं और उसे गाय को खिला दें। ऐसा करने से आपके परिवार में सुख-शांति की वृद्धि होगी। 4. मौनी अमावस्या के दिन आप चावल का खीर बना लें। फिर उसे भगवान शिव और माता लक्ष्मी जी को अर्पित करें। ऐसा करने से दरिद्रता दूर होगी, धन-संपत्ति में बढ़ोत्तरी होगी। 5. मौनी अमावस्या की शाम को गाय के घी का एक दीपक ईशान कोण में जलाएं। दीपक में बत्ती के लिए लाल रंग के धागे का प्रयोग करें। ऐसा करने से आपके परिवार पर माता लक्ष्मी की कृपा होगी। 6. कालसर्प दोष के निवारण के लिए मौनी अमावस्या का दिन विशेष फल वाला होता है। इस दिन स्नान के बाद चांदी से बने हुए नाग-नागिन के जोड़े की पूजा करें और उसे नदी में प्रवाहित कर दें। मौनी अमावस्या के दिन ये उपाय करने से आपके जीवन में सकारात्मक बदलाव आएंगे। आपकी मनोकामनाएं पूर

लिवर, गैस और गुर्दे की मजबूती के लिए कारगर है कागासन पढ़े एक्सपर्ट की राय


2020-01-13

नई दिल्‍ली: इस आसन की अंतिम अवस्था में शरीर की आकृति कौए जैसी हो जाती है, इसलिए इसे कागासन या क्रो पोज कहा जाता है। इस आसन को सुबह के वक्त करना अच्छा माना जाता है। पेट के कई रोगों में इसे रामबाण माना गया है। इसके अभ्यास से यौगिक क्रियाओं को कुशलतापूर्वक करना संभव होता है, जैसे नेति क्रिया इसी आसन में बैठकर की जाती है। शंख प्रक्षालन और कुंजल क्रिया के लिए इसी आसन में बैठा जाता है। जानें क्‍या कहते है भारतीय योग एवं प्रबंधन संस्थान मुरथल के कुमार राधा रमण। सावधानी जिन्हें एड़ियों, कमर, जांघों और घुटनों में परेशानी हो, वे किसी योग्य योग विशेषज्ञ के निर्देशन में ही इसे आजमाएं। योग विशेषज्ञ से इस आसन की विधि जानें। लाभ पेट पर संचित वसा को कम करने में उपयोगी है। जांघ पर संचित वसा दूर होती है और सुंदरता बढ़ती है। वायुविकार दूर होते हैं और वायुजनित रोगों में लाभ मिलता है। पेट के सभी अंग सक्रिय होते हैं। लिवर और गुर्दे बेहतर काम करते हैं। यह है विधि कुमार राधा रमण ने बताया कि सीधे खड़े हों ताकि शरीर की मुद्रा सावधान की स्थिति में रहे। पैर के पंजे बिल्कुल सीधे और हथेलियां कमर से चिपकी हुई हों। कुछ पल अपनी आती-जाती सांसों पर ध्यान केंद्रित करें। सांस धीमी, लंबी और गहरी हो। जब चित्त स्थिर होता प्रतीत हो तब सांस छोड़ते हुए धीरे-धीरे दोनों पैरों को सटाकर इस प्रकार बैठ जाएं कि दोनों पैरों के बीच कोई अंतर न रहे। अब बाईं हथेली से बाएं घुटने को और दाईं हथेली से दाएं घुटने को इस प्रकार पकड़ें कि दोनों कोहनियां जांघों, सीने और पेट के बीच में आ जाएं। पैरों के पंजे बाएं-दाएं मुड़ने न पाएं और सामने की तरफ ही रहें। गर्दन, रीढ़ और कमर को भी बिल्कुल सीधा रखें और सामने की ओर सहज सांस के साथ एकटक देखें। फिर दाहिनी एड़ी से जमीन पर हल्का दबाव बनाते हुए गहरी स

Chandra Grahan 2020 Timing: चंद्र ग्रहण 4 घंटे का, जानें कितने बजे लगेगा


2020-01-09

साल का पहला ग्रहण आज लग रहा है. यह ग्रहण पूर्ण ग्रहण न होकर एक उपच्छाया चंद्र ग्रहण होगा, जो पूर्ण चंद्र ग्रहण से काफी धुंधला होता है. इस चंद्र ग्रहण की अवधि कुल 4 घंटे 01 मिनट की होगी. इसके बाद साल 2020 में तीन और चंद्र ग्रहण पड़ेगें जो कि 5 जून, 5 जुलाई और 30 नवंबर को होंगे. खास बात यह सभी ग्रहण उपच्छाया ग्रहण ही होंगे. आइए जानते हैं आज लगने वाले चंद्र ग्रहण के आरंभ, मध्यकाल और मोक्षकाल के बारे में. क्या है चंद्र ग्रहण लगने का समय? (Chandra Grahan Timing) आज लगने वाला चंद्र ग्रहण रात को 10 बजकर 37 मिनट पर शुरू होगा और अगली तारीख यानी 11 जनवरी को तड़के पौने तीन बजे तक चलेगा. भारत के अलावा ये ग्रहण यूरोप, एशिया, अफ्रीका और आस्‍ट्रेलिया महाद्वीपों में भी देखा जा सकेगा. इस चंद्रग्रहण की खास बातें इस बार का चंद्र ग्रहण उपच्छाया चंद्र ग्रहण होगा. शास्त्रों में उपच्छाया चंद्र ग्रहण को ग्रहण के रुप में नहीं माना जाता है. इसलिए आज पूर्णिमा तिथि के पर्व और त्योहार मनाए जा सकेंगे. इस ग्रहण में चंद्रमा मिथुन राशि में होगा, नक्षत्र पूर्नवसु रहेगा. मिथुन राशि के लोगों को चंद्र ग्रहण के समय सावधान रहने की जरूरत पड़ेगी. पूर्नवसु नक्षत्र के लोगों को भी बेवजह की परेशानियां झेलनी पड़ सकती हैं. क्या इस चंद्र ग्रहण पर सूतक लगेगा? (Sutak) ज्योतिष शास्त्रों के अनुसार उपच्छाया चंद्र ग्रहण को ग्रहण की श्रेणी में नहीं रखा जाता है और यही वजह कि बाकी ग्रहणों की तरह इस चंद्र ग्रहण में सूतक काल नहीं लगेगा. सूतक काल ना लगने के कारण ना ही आज मंदिरों के कपाट बंद किए जाएंगे और ना ही पूजा-पाठ वर्जित होगी. इसलिए इस दिन आप सामान्य दिन की तरह ही सभी काम कर सकते हैं. इस ग्रहण की सावधानियां और नियम क्या हैं? यह ग्रहण चन्द्रमा का उपच्छाया ग्रहण है. यह सामान्य रूप से देखा नहीं जा सकेगा. इसमें चन्द

साल के पहले ग्रहण पर कर लें ये काम, खुल जाएगा अमीरी का रास्ता


2020-01-09

10 जनवरी को साल का पहला ग्रहण लगने जा रहा है. ग्रहण के दिन कुछ खास उपाय करके आप सुख, समृद्धि और सौभाग्य प्राप्त कर सकते हैं. यह चंद्र ग्रहण रात 10:37 से शुरू होकर 11 जनवरी की रात 2:45 तक रहेगा. साल 2020 में कुल 6 ग्रहण लगेंगे जिसमें 2 सूर्य और 4 चंद्र ग्रहण होंगे. ये साल का पहला ग्रहण है. पंडित कमल नंदलाल से जानते हैं कि इस चंद्र ग्रहण पर आपको क्या करके अपना सौभाग्य बढ़ा सकते हैं. ग्रहण शिवलिंग को छोड़कर सभी मूर्त-अमूर्त चीजों पर लगता है. एकमात्र शिवलिंग ही है जिसकी ग्रहण के दौरान उपासना की जा सकती है. शिवलिंग सभी दोषों का नाश करता है. चंद्र ग्रहण के दौरान पूजा घर में रखे पारद शिवलिंग का जलाभिषेक करें. पारद शिवलिंग की विशेष पूजा ग्रहण के प्रभाव को कम करती है. चंद्र ग्रहण के दौरान किसी आसन पर बैठ कर शिवलिंग को अपने सामने रखें और धूप बत्ती जलाकर उसकी पूजा करें. पूजा के दौरान पारद शिंवलिंग पर चंदन समर्पित कर उसे अपने मस्तिष्क पर तिलक की तरह लगाएं.

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  • मेरठ में बनेगा देश का पहला गैसीफिकेशन तकनीक से बिजली बनाने का संयंत्र, सांसों के दुश्मन को अब लगेगा ‘करंट’ मेरठ,। मेरठ भूड़बराल स्थित बिजली संयंत्र में आरडीएफ (कूड़े से छांटकर निकाले प्लास्


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पत्नी - बाजार से दूध का एक पैकेट ले आओ!

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हां, अगर बाजार में नींबू दिखे तो छह ल